कर प्रकट आभार हृदय से
हर क्षण करे तब भी कम
हाड़ मांस में भी है प्राण
"कृतज्ञता" ही है बस प्रमाण
यज्ञ अनुष्ठान से पूर्ण होती मनोकामनाएं
पर पूर्णता का आभास कराती बस यह "कृतज्ञता"
प्रकृति का है यह जीवन मंच
और "संत तपोबल" इस मंच का श्रृंगार
दृष्टि ऐसी दिव्य "तपोबल" की
खोज लेती करुणा, कपट के मंच पर भी
कवच बनाए जो बेचकर दिव्य स्मृतियों को
उसे निश्छल कृतज्ञता से प्राप्त कवच का क्या मोल
स्मृतियों को संचित करे, वही असल धनवान
वैसे तो मायावी भक्त भी कई, जो करे यज्ञ अनुष्ठान
#ऋषि_पंचमी