सत्ता के सिंहासन पर बैठा एक संत है
जिसके मुख से निकला हर शब्द राष्ट्रसेवकों के लिए एक मंत्र है
जिस मंत्र के उच्चारण से विचलित होता एक specific तंत्र है
जिसकी कुंठा से जन्म लेता हर रोज एक नया षडयंत्र है
और इस षडयंत्र के मंच पर होता हर रोज एक नया प्रपंच है
और इसी मंच के सरपंच के SCRIPT मे हर रोज घायल होता लोकतंत्र है
Stage 2 - SCRIPT
हर रोज किसी ना किसी के अपमान का कॉन्ट्रैक्ट लेती है यह SCRIPT
हर रोज एक नए मंच से षडयंत्र का नया नैरेटिव गढ़ती है यह SCRIPT
असफलता ही इसके हाथ लगेगी, जानते हुए भी अपने पथ पर अडिग रहती है यह SCRIPT
अपने customised सिद्धांतों से कभी समझौता नही करती यह SCRIPT
अपने चाहने वालों को भी खुद से दूर करने की कला में निपुण है यह SCRIPT
अनगिनत अलौकिक शक्तियां होने के बावजूद भी तर्क के मंच पर जाने से कतराती है यह SCRIPT