कर्कश ध्वनि के व्यापारी

 झूठ गूंजती बहुत है, सच है...

इसीलिए शायद उस गूंजती हुई कर्कश ध्वनि को होलसेल मे खरीदने वाले व्यापारी भी कई हैं...

एक दिन एक ग्राहक पहली बार इस कर्कश गूंज की होलसेल मंडी में पहुंचा

और उस मंडी की भव्यता देख उसने सोचा , शायद वो यह प्रोडक्ट अफोर्ड नही कर पाएगा...

पर जैसे ही मंडी के एक सेल्समैन ने उसे ये कहा , की 1st time visitor के लिए "फ्री" है यह प्रोडक्ट, शर्त यह कि बस इस बार अपने अंतरात्मा की गूंज को अनसुना करना पड़ेगा....

एक बार ही तो अनसुनी करनी होगी अंतरात्मा की गूंज को, यह सोचकर खरीद ली उसने वह कर्कश ध्वनि...

शायद मंडी की चकाचौंध और सेल्समैन की चालाकी ने उसे बाध्य कर दिया उस दिन....

पर शायद वो यह भूल गया कि अंतरात्मा की गूंज को अनसुना करना सरल है पर जीवन मै दुबारा उस गूंज को महसूस करने के लिए तरसते रहना उस सरल कार्य का दुःखद परिणाम है....

कर्कश ध्वनि के व्यापारी

 झूठ गूंजती बहुत है, सच है... इसीलिए शायद उस गूंजती हुई कर्कश ध्वनि को होलसेल मे खरीदने वाले व्यापारी भी कई हैं... एक दिन एक ग्राहक पहली बार...